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Brahmakumaris Bhilai

“नवदशकोंत्सव” 90वें वर्ष पर महाशिवरात्रि परिवर्तन मास का शुभारंभ

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पीस ऑडिटोरियम में वसंत ऋतु के आगमन पर महाशिवरात्रि पर्व (शिव जयंती उत्सव) का शुभारंभ किया गया।
ब्रह्माकुमारीज़  संस्था के  “नवदशकोंत्सव” 90वें वर्ष में प्रवेश पर महाशिवरात्रि परिवर्तन मास का शुभारंभ..
नई दुनियां अर्थात संपूर्ण पावन जहां एक राज्य एक धर्म एक भाषा थी।
मेरा उपहार परमात्मा को महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को अर्पण करेंगे अपने अवगुण,कमी कमज़ोरियां..
भिलाई 1 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़:- अंतर्राष्ट्रीय  संस्था प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के 90वें वर्ष में प्रवेश होने के उपलक्ष में सेक्टर 7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में वसंत ऋतु के आगमन पर महाशिवरात्रि पर्व (शिव जयंती उत्सव) का शुभारंभ किया गया।
भिलाई सेवा केद्रों की  निदेशिका ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने कहा कि यह समय विश्व परिवर्तन, स्वयं के परिवर्तन और संस्कारों के परिवर्तन का समय है।
 पुरानी दुनियां बदल कर नई दुनियां का आगमन इस सृष्टि पर होगा यह परिवर्तन का समय है, हमारी जिम्मेवारी है कि हमें नई दैवीय दुनियां के लिए हमारे संस्कारों को भी सतोंप्रधान दैवीय बनाना है नई दुनियां अर्थात संपूर्ण पावन जहां एक राज्य एक धर्म एक भाषा थी।
आपने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व तक सभी अपने कमी कमजोरी को आत्म चिंतन द्वारा भोलेनाथ शिव पर अर्पित करेंगे। महत्व समय पर परिवर्तन का है।
 आपने बताया कि दूसरों को बदलने की अवगुण देखने की वृति को चेंज करो, देखना है तो विशेषताएं देखो। सोचा और किया करेंगे देखेंगे नहीं।
आपने तीन श्रेष्ठ आसन(तख्त) के बारे में बताया कि पहला भृकुटी के मध्य आत्मा मालिक का तख्त ,दूसरा शिव परमात्मा(भोलेनाथ )का दिल तख्त,तीसरा नई सृष्टि के राज्य अधिकारी का तख्त अर्थात मैं आत्मा भृकुटी के मध्य में निवास सर्व शक्तिवान परमात्मा की संतान इन शरीर रूपी कर्मेंद्रियों द्वारा कार्य कराकर परमात्मा के दिल तख्त पर विराजमान भविष्य नई दैवीय दुनियां की सर्व गुण संपन्न राज्य अधिकारी आत्मा हूं।
 हमें हमारे श्रेष्ठ दैवीय संस्कारों से नई दुनियां की स्थापना करनी है, धर्म अर्थात धारणा।
ब्रह्माकुमारी दीदीयों ने 90 वर्ष के उपलक्ष्य में  दीपक जलाकर शिव ध्वज फहराकर महाशिवरात्रि परिवर्तन मास की शुरुआत की।
सभी ब्रह्मा वत्स मेरा उपहार शिव परमात्मा को अपने परिवर्तन  का  स्व उन्नति का चार्ट भरकर अपनी कमी कमजोरियों को महाशिवरात्रि के दिन  परमात्मा शिव भोलेनाथ को अर्पण करेंगे।
इस अवसर पर फूलों से विशाल ज्योतिर्लिंग की रंगोली बनाई गई।  पीस ऑडिटोरियम और परिसर को शिव ध्वजों से सुंदर सजाया गया।