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Brahmakumaris Bhilai

ज्यादा सोचने से तन मन की बीमारियों का आगमन,करे प्राणायाम और राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास

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"ज्यादा सोचने की आदत पर विजय" ओवरकमिंग ओवर थिंकिंग विषय पर पीस ऑडिटोरियम में हैदराबाद से पधारे मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार बाला किशोर
ज्यादा सोचने से तन मन की बीमारियों का आगमन,करे प्राणायाम और राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास
ब्रह्माकुमारीज़ का आयोजन “ज्यादा सोचने पर विजय” कार्यक्रम में हैदराबाद से आए बाला किशोर ने दिए टिप्स…
20 जुलाई 2026भिलाई:-  कार्य के सफल या असफल होने में हमारे संकल्पों का अहम योगदान होता है ,हमारे मन के विचारों से हमारा मस्तिष्क प्रभावित होता है, मन में आने वाले विचारों से ही हमें सुख और दुख की अनुभूति होती है। बिना ब्रेक के जरूरत से ज्यादा सोचना तन और मन की बीमारियों द्वारा बुढ़ापे को जल्दी निमंत्रण देना है।
यह बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा “ज्यादा सोचने की आदत पर विजय” ओवरकमिंग ओवर थिंकिंग विषय पर  सेक्टर-7,  स्थित पीस ऑडिटोरियम में आयोजित सत्र में  हैदराबाद से पधारे  मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार बाला किशोर जी ने व्यक्त किए।
 आपने  सच्चाई और कहानी से जुड़े विचारों को बताया कि मौसम,ट्रैफिक समस्या,दूसरों का आचरण सच्चाई है जिसे हम कंट्रोल नहीं कर सकते है।
इसके विपरीत निगेटिव व्यर्थ विचारों की कहानी जो हम एक के बाद एक विचारों की श्रृंखला से  अनुमान द्वारा घने काले बादलों से घिर जाते हैं। जिससे बचने गहरी श्वांस, प्राणायाम, राजयोग मेडिटेशन, तटस्थता का भाव धारण करे।
आपने सर्वशास्त्र शिरोमणि श्रीमद भगवत गीता के श्लोक *कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥* के बारे में बताया कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तुम अपने कर्मों के फल का कारण मत मानो और न ही कर्म न करने में आसक्त हो।
व्यर्थ और निगेटिव विचार जंगल के समान होते है जो बढ़ते ही जाते है और सकारात्मक विचारों से सुंदर बगिया(गार्डन) बन हमारा जीवन तनावमुक्त रहता है। जिसकी सम्हाल हमें करनी है।
आपने क्लोज द पॉपअप,क्लिक द पॉपअप , गेम्स और विभिन्न एक्टिविटी द्वारा अत्यधिक सोचने से बचने के उपायों को समझाया।
सर्वप्रथम उपस्थित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया।
भिलाई सेवाकेंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि शरीर की व्याधि के लिए हम भोजन में नमक,शक्कर का सेवन कंट्रोल करते है,वैसे ही बोलने सोचने में भी कंट्रोल करने से हमारे तन, मन के लिए रिश्तों के लिए हमारे जीवन के लिए वरदान है।
डिवाइन ग्रुप के बच्चों ने सुंदर सांस्कृतिक नृत्य द्वारा सभा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी को वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी द्वारा राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया।
कार्यक्रम का शिक्षा, चिकित्सा,रिसर्च स्कॉलर ,व्यापार जगत से जुड़े प्रबुद्धजनो ने बड़ी संख्या में लाभ लिया।

ब्रह्माकुमार बाला किशोर जी बी.ई., एम.टेक. एवं पीएचडी स्कॉलर हैं। वे बेटर लिविंग के उपाध्यक्ष, ब्रिटिश शेवेनिंग स्कॉलर, आईआईटी मंडी के शोधार्थी तथा ‘स्पायर आईटी समिट’ के संस्थापक हैं। वर्ष 1993 से राजयोग का अभ्यास कर रहे ब्रह्माकुमार बाला किशोर जी भारत के प्रथम डिजिटल वेलनेस कोर्स के निर्माता तथा ब्रह्माकुमारीज़ आईटी विंग के वरिष्ठ सदस्य भी हैं।

जब अनावश्यक चिंतन समाप्त होता है, तभी वास्तविक शांति का आरंभ होता है।